रायपुर: मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने पंच-सरपंचों का आव्हान किया कि वे ‘हरियर छत्तीसगढ़’ अभियान के तहत गांवों में तालाबों के किनारे और खाली पड़ी सरकारी जमीनों पर ग्रामीणों के सहयोग से आम, जामुन, आंवला, इमली, हर्रा, बहेड़ा, नीम, पीपल और बरगद के पौधे लगवाकर हर गांव में ऑक्सीजोन विकसित करें। इससे पर्यावरण स्वच्छ रहेगा और ग्रामीणों को स्वादिष्ट फल मिलेंगे साथ ही ये पेड़ हर्बल औषधियों के भी अच्छे स्त्रोत के रूप में काम आएंगे।

मुख्यमंत्री आज शाम यहां अपने निवास परिसर में हमर छत्तीसगढ़ योजना के तहत पामगढ़, लोरमी और मरवाही विकासखण्डों से आए 559 पंच-सरपंचों और सहकारी समितियों के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। राजस्व मंत्री श्री प्रेम प्रकाश पाण्डेय, संसदीय सचिव द्वय श्री अम्बेश जांगड़े और श्री तोखन साहू भी इस अवसर पर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने अपने निवास में पंचायत प्रतिनिधियों और सहकारिता प्रतिनिधियों का आत्मीय स्वागत किया।

डॉ. रमन सिंह ने इस बात पर खुशी जताई कि हरियर छत्तीसगढ़ अभियान में जांजगीर-चांपा जिले की ग्राम पंचायत धरदेई में 250 एकड़ की सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त करने के बाद उसमें बड़ी संख्या में इस प्रकार विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाकर वहां के पंच-सरपंचों और ग्रामीणों ने ऑक्सीजोन विकसित किया है। इसके लिए धरदेई के ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों को बधाई दी।

हमर छत्तीसगढ़ योजना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के पंचायत प्रतिनिधियों को इस योजना के तहत रायपुर तथा नया रायपुर के राज्य स्तरीय प्रतिष्ठानों का अवलोकन करवाया जा रहा है। उन्हें प्रदेश के विभिन्न जिलों में हो रहे विकास कार्यो की जानकारी भी इस योजना के जरिए मिल रही है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दो साल की इस योजना का पहला साल विगत 30 जून को पूरा हो चुका है। अब तक 96 हजार पंच-सरपंच और अन्य पंचायत प्रतिनिधि और सहकारिता क्षेत्र के प्रतिनिधि योजना के तहत अध्ययन भ्रमण पर यहां आ चुके हैं।

डॉ. सिंह ने गांवों के विकास में पंच-सरपंचों की भूमिका का उल्लेख करते हुए उनसे ऐसे कार्य करने के लिए कहा कि जिन्हें आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखें। इसी कड़ी में उन्होंने पंच-सरपंचों से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने के लिए भी ग्रामीणों को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया।

डॉ. सिंह ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गरीब परिवारों को दिए जा रहे रसोई गैस कनेक्शनों का भी उल्लेख किया। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के तेरह लाख से ज्यादा किसानों को सहकारी समितियों में वर्ष 2016 में बेचे गए धान के लिए 300 रूपए प्रति क्विंटल की दर से 2100 करोड़ रूपए का बोनस देने का निर्णय लिया है।

यह राशि उनके खाते में दीपावली के पहले जमा कर दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के सूखा प्रभावित क्षेत्र के किसानों को राजस्व पुस्तक परिपत्र के प्रावधानों के अंतर्गत सूखा राहत का मुआवजा और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमा राशि का भुगतान किया जाएगा। संसदीय सचिव द्वय श्री अम्बेश जांगड़े और श्री तोखन साहू ने भी पंचायत प्रतिनिधियों को संबोधित किया।