शिवराज का युवाओं को ‘दिल से’ जोडऩे का प्रयास

शिवराज का युवाओं को ‘दिल से’ जोडऩे का प्रयास

कृष्णमोहन झा

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं)

नवाचार के लिए विख्यात शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मन की बात’ के तर्ज पर आकाशवाणी से ‘दिल से’ कार्यक्रम की शुरुआत कर दी है। 13 अगस्त को प्रसारित पहले कार्यक्रम में शिवराज सिंह चौहान ने किसानों से बात की। मंदसौर गोलीकाण्ड के बाद से ही विपक्ष सरकार को किसानों के मुद्दे पर हर मोर्चे पर घेरने का प्रयास कर रहा था लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने पहले कार्यक्रम में ही किसानों से बात कर सब को चौका दिया। दिल से के माध्यम से मुख्यमंत्री चौहान से सीधे संवाद कायम करने वाले किसानों ने जहां खुलकर अपनी बात मुख्यमंत्री शिवराज के सामने रखी वहीं सरकार द्वारा किसानों के कल्याण के लिए चलाई जा रही जमीनी हकीकत से भी अवगत कराया। जनता से सीधे संवाद के इस माध्यम को लेकर प्रदेश के आमजन में काफी उत्साह है। राजनीतिक पंडितों का भी यह मानना है कि मुख्यमंत्री का यह जनता के बीच में संवाद काफी असरकारक होगा। किसानों के अलावा अब शिवराज युवाओं को ‘दिल से’ जोडऩे का प्रयास कर रहे है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने युवाओं को जोडऩे युवा पंचायत का भी आयोजन किया था। लाल परेड गाउंड और जम्बूरी मैदान में संपन्न युवा पंचायत में मुख्यमंत्री ने युवा स्वरोजगार योजना की घोषणा की थी जिसमें 25 लाख तक के उद्योगों के लिए 5 प्रतिशत अनुदान सरकार द्वारा बैंक ऋण पर शत प्रतिशत गारंटी सरकार ने दी थी ऐसे दो दर्जन से भी अधिक योजनाओं की जमीनी हकीकत जानने का भी अवसर मुख्यमंत्री को इस कार्यक्रम के माध्यम से मिलेगा। मुख्यमंत्री ने 2013 के चुनावों के पहले युवा आयोग बनाने की घोषणा की थी लेकिन राजनैतिक उठापटक के चलते आज तक युवा आयोग का गठन नहीं हो सका है। व्यापमं घोटाले के बाद यह पहला अवसर है जब मुख्यमंत्री युवाओं से मुखातिब होंगे। युवा वर्ग देश का भविष्य होने के साथ साथ हमारे देश के विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विवेकानंद जी से लेकर नरेन्द्र मोदी ने हमेशा युवाओं को राष्ट्र विकास का भागीदार माना है और यही वजह है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2014 में युवा नीति की घोषणा की थी केन्द्र सरकार का पूरा फोकस युवाओं को साधने में है और यही वहज है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान युवाओं से संवाद स्थापित एक बड़े वोट बैंक को अपने साथ जोडऩा चाहते है।

शिवराज सिंह चौहान एक ऐसा नाम हैं जो हिन्दी भाषी राज्यों के साथ-साथ देश के सभी राज्यों और केन्द्र शासित राज्यों में सबसे ज्यादा चर्चित नाम है। वजह मध्यप्रदेश जैसे बीमारू राज्य को आज देश के विकसित प्रदेशों की श्रेणी में लाकर एक आदर्श राज्य के रूप में स्थापित कर दिया है। मुझे अच्छे से याद है ग्वालियर में संपन्न भाजपा की राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक को संबोधित करते हुए भाजपा के पितृ पुरूष कहलाने वाले भारत के पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि शिवराज ने वह अद्भूत कार्य किया है  जो सामान्य प्रशासक नहीं कर समता। मध्यप्रदेश पर जो बीमारू राज्य का कलंक लगा था उसे विकसित राज्यों की श्रेणी में लाना बड़ी उपलब्धि है वे यहां पर भी नहीं रूके थे उन्होंने कहा कि पहले से संपन्न राज्य को विकास के नये आयाम देना उतना बड़ा काम नहीं है जितना एक बुनियादी सुविधाओं के लिए उस राज्य में काम करना है। उनका इशारा गुजरात की तरफ था। खैर यह बात तो बहुत पुरानी हो गई देश के वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सैकड़ों मंच पर चाहे वह देश का हो या विदेश का सभी जगह मध्यप्रदेश में हो रहे विकास की प्रशंसा की है। उन्होंने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की हर जगह खुले दिल से तारिफ की है। कुछ समय से प्रदेश में अटकले लगाई जा रही थी कि क्या 2018 का चुनाव शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में होगा? तरह तरह के कयासों के बीच हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी स्पष्ट कर दिया कि प्रदेश का विधानसभा चुनाव शिवराज सिंह चौहान जी के नेतृत्व में ही लड़ा जाएगा। शाह की क्लिीन चिट और घोषणा के बाद शिवराज विरोधी रवैये के लोग चारो खाने चीत हो गए है, लेकिन शिवराज सिंह चौहान सारे विरोधों की परवाह किए बिना मिशन 2018 की तैयारी में जुट गये है। कुछ समय से विपक्ष प्रदेश में मंदसौर जिले में हुए गोलीकाण्ड को लेकर मुद्दा बनाए था। विपक्ष का मानना था कि प्रदेश का किसान सरकार से काफी नाराज हे और वह प्रदेश के जनजाति क्षेत्रों में हो रहे नगरीय निकाय चुनावों में वोट के माध्यम से अपनी नाराजगी व्यक्त करेगा लेकिन ऐसा कुछ हुआ नहीं। भाजपा ने इन चुनावों में भी जीत का सिलसिला जारी रखा। मुख्यमंत्री ने किसानों की समस्या को जानने सबसे पहले आकाशवाणी में एक कार्यक्रम की शुरूआत की जिसका नाम दिया ‘दिल से’। इस कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने किसानों की समस्याओं को सुनने और समझने का प्रयास किया हालांकि इस कार्यक्रम को लेकर विपक्ष की अपनी राय थी लेकिन बावजूद इसके किसानों ने इस कार्यक्रम में बढ़ चढक़र हिस्सा लिया और अपनी समस्याओं को खुलकर सामने रखा। मुख्यमंत्री ने एक तरफ इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों में उपजाये जा रहे सरकार विरोधी बीज को नष्ट किया वहीं किसानों को सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं की जमीनी हकीकत समझने का प्रयास किया। इस संवाद से किसानों को सरकार और शिवराज से सीधे जुडऩे का अवसर मिला। अपने दूसरे ‘दिल से’ कार्यक्रम जो 10 सितंबर को प्रसारित होने जा रहा है का विषय रखा है कैसे गढ़े नया मध्यप्रदेश जिसमें प्रदेश के युवाओं से प्रदेश का विकास कैसे हो और सरकार को आगे और क्या करना चाहिए इस विषय पर चर्चा होगी। सहज सरल व्यक्तित्व के धनी होने के साथ ही शिवराज राजनीति के चतुर खिलाड़ी है। ‘दिल से’ कार्यक्रम के माध्यम से उनका प्रयास प्रदेश के उन 35 प्रतिशत मतदाताओं से सीधे जुडऩे का है जिनका जन्म कांग्रेस शासन काल में हुआ और जो पहली बार अपने मताधिकार का उपयोग 2018 के विधानसभा चुनाव में करेंगे। लम्बे समय से विपक्ष  ‘व्यापमं’ को हवा देकर युवाओं को सरकार के विरोध में खड़े करने का प्रयास कर रहा था इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से उन सारे प्रश्नों का उत्तर ले पाएंगे जो लम्बे समय से विपक्ष ने उनके सामने खड़े किये है। इतना ही नहीं एक अवसर होगा कि युवा कैसे मध्यप्रदेश की कल्पना करते है उससे अवगत होने का कल्पनाओं की दुनिया में गोते लगाने वाले युवाओं के लिए ‘दिल से’ एक मंच है, एक अवसर है जिसमें वे अपनी कल्पनाओं को मूर्त रूप देने की कोशिश भी कर सकते है।

मुख्यमंत्री ने चुनावी बिसात बिछाना प्रारंभ कर दिया है और ‘दिल से’ कार्यक्रम उसी का अंश है जिसमें प्रदेश के सबसे बड़े वोट बैंक को साधने का प्रयास करेंगे। युवाओं के सुझाव से एक नये मध्यप्रदेश को मूर्त रूप दिया जा सकेगा वहीं युवाओं के कंधों में भी नये मध्यप्रदेश के गढऩे का दायित्व होगा।

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