पटना : हाईकोर्ट में बिहार विशेष प्रारंभिक शिक्षक नियुक्ति नियमावली 2010 के नियम 12 सेवाशर्त को चुनौती देते हुए सूबे में वेतनमान पर बहाल 34540 शिक्षकों को पेंशन दिये जाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई मंगलवार को अधूरी रही.

अब इस मामले की सुनवाई 31 अक्तूबर को होगी. चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन व जस्टिस डाॅ अनिल कुमार उपाध्याय की खंडपीठ ने नंदकिशोर ओझा व अन्य की ओर से दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए उक्त तिथि निर्धारित की.

सुनवाई के क्रम में याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया गया कि 2003 में 34540 शिक्षकों को वेतनमान पर बहाल करने का विज्ञापन निकाला गया था. अदालत को यह बताया गया कि उक्त बहाली में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन नहीं कर अंशदान की व्यवस्था लागू की गयी.

यदि उच्चतम न्यायालय के आदेश का अनुपालन सही समय पर राज्य सरकार करती, तो सभी शिक्षक पेंशन के हकदार होते. पिछली सुनवाई में अदालत ने कहा था कि जब ऐसे शिक्षकों की बहाली ही नहीं हुई थी तब कैसे आप को यह सुविधा दी जाये.

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि उक्त बहाली विशेष योजना के तहत की गयी थी. अदालत को बताया गया कि केवल चार हजार शिक्षक ही हैं जिन्हें यह सुविधा मिलनी है.

इस पर अदालत ने याचिकाकर्ता से पूछा था कि आप उन सबों से कैसे अलग हैं और केवल चार हजार को पेंशन दिया जाना कहां तक न्यायोचित होगा. राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि बिहार सरकार ने 2004 के बाद पेंशन योजना खत्म कर अंशदान दिये जाने का प्रावधान किया है. जबकि, इन शिक्षकों की बहाली वर्ष 2005 में की गयी है.