मंत्रीमंडल में फेरबदल से मोदी ने रचा इतिहास

कृष्णमोहन झा
(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और आईएफडब्ल्यूजे के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं)
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछले तीन सालों से हर महीने अपने मन की बात देशवासियों के साथ साझा करते चले आ रहे हैं परंतु प्र्रधानमंत्री के मन में क्या चल रहा है इसका पूर्वानुमान लगा पाना तो दीर्घानुभवी राजनीतिक पंडितों के लिए भी संभव नहीं है। जरा सोचिए हाल में ही जब मोदी मंत्रिमंडल के 6 सदस्यों ने सरकार से इस्तीफा दिया था और उसके फलस्वरूप केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में फेरबदल की संभावनाएं व्यक्त की जा रही थी तब क्या कोई कल्पना कर सकता था कि प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की एक राज्यमंत्री की पदोन्नति कर उन्हें रक्षा मंत्री पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपने का मन बना चुके हैं। मोदी सरकार में अब तक व्यापार व वाणिज्य मंत्रालय का कार्यभार संभाल रही निर्मला सीतारमण की पदोन्नति की बात तो सोची जा सकती थी परंतु उन्हें पदोन्नति के साथ साथ रक्षामंत्री पद से नवाजने का जो ऐतिहासिक फैसला प्रधानमंत्री ने लिया उससे तो स्वयं निर्मला सीतासरण भी आश्चर्य चकित हुए बिना नहीं रह सकीं। रक्षामंत्री पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद उन्होंने जो प्रतिक्रिया व्यक्त की उससे भी यही जाहिर होता है। उन्होंने अभिभूत होते हुए कहा कि कही न कही दैवीय कृपा तो है वरना यह संभव नहीं होता। निर्मला सीतारमण चार अन्य राज्य मंत्रियों के साथ पदोन्नति पाकर केबिनेट मंत्री बनी हैं परन्तु उनकों मिली जिम्मेदारी तो इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुकी है। गौरतलब है कि अतीत में पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने भी कुछ समय तक रक्षा मंत्रालय अपने पास रखा था परंतु एक महिला सांसद को पूर्णकालिक रक्षामंत्री की जिम्मेदारी से नवाजे जाने का फैसला स्वतंत्र भारत के इतिहास में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ही किया है। निश्चित रूप से प्रधानमंत्री ने निर्मला सीतारमण के कंधों पर गहन जिम्मेदारी सौंपी है और निर्मला सीतारमण अपने को इस पद के सर्वथा उपयुक्त सिद्ध करने में कोई कसर नहीं उठा रखेंगी अब तक रक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी संभाल रहे केन्द्रीय वित्तमंत्री अरूण जेटली ने निर्मला सीतारमण को रक्षामंत्री बनाने के प्रधामंत्री मोदी के फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि सीतारमण अपनी काबिलियत से इस मुकाम पर पहुंची हैं। यहां यह बात भी विशेष उल्लेखनीय है कि रक्षामंत्री पद से नवाजे जाने के बाद निर्मला सीतारमण अब केबिनेट कमेटी आन सिक्यूरिटी की सदस्य भी बन गई है। इस समिति में पहली बार दो महिला मंत्रियों को जगह मिली है। विदेश मंत्री के रूप में सुषमा स्वराज पहले ही इस समिति की सदस्य है। विदेश, गृह, रक्षा और वित्तमंत्री एवं गृहमंत्री की अनुपस्थिति में रक्षा मंत्री को इस समिति की बैठक की अध्यक्षता करने का अधिकार होता है अत: प्रोटोकाल की दृष्टि से निर्मला सीतारमण का कद सुषमा स्वराज से अधिक ऊंचा होगा।
केन्द्रीय मंत्रिमंण्डल में फेरबदल के कयास तो उसी समय से लगाए जाने लगे थे जिस समय 10 मंत्रियों से इस्तीफा मांग लिए गए थे। इस्तीफा देने वाले मंत्रियों में सबसे वरिष्ठ कलराज मित्र को राज्यपाल पद से नवाजे जाने की संभावनाएं बलवती दिखाई दे रही हैं परंतु बाकी पूर्व मंत्रियों को अब संगठन में कौन सी जिम्मेदारी सौंपी जाती है यह उत्सुकता का विषय होगा।
प्रधामंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में जो फेरबदल किया है उसमें बिहार से भी दो मंत्री बनाए गए हैं परंतु दोनों भी भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को निश्चित रूप से मायूस कर दिया है जिन्होंने यह आस लगा रखी थी कि प्रधानमंत्री मोदी अपनी टीम के पुनर्गठन में जदयू को भी प्रतिनिधित्व प्रदान करेंगे। प्रधानमंत्री ने नीतिश कुमार को परोक्ष रूप से यह संदेश दे दिया है कि बिहार में भले ही भाजपा जदयू गठबंधन सरकार के मुख्यमंत्री पद की बागडोर नीतिश कुमार के हाथों में रहने देने के लिए भाजपा तैयार हो गई हो परन्तु नीतिश कुमार को भाजपा की शर्तों पर ही राजनीति करनी होगी। नीतिश कुमार पहले ही कह चुक हैं कि इस समय देश में प्रधानमंत्री पद के लिए नरेन्द्र मोदी ही सबसे काबिल नेता हैं इसलिए अब अगर भाजपा या केन्द्र सरकार का कोई फैसला उन्हें न भी सुहाए तब भी उन्हें मन मसोसकर स्वीकार करना पडग़ा। बिहार में महागठबंधन तोडक़र भाजपा के सहयोग से सरकार बनाने के नीतिश के फैसले से सख्त नाराज राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में जदयू को प्रतिनिधित्व न मिलने पर नीतिश कुमार पर निशाना साधते हुए जो कहा है वह दरअसल वास्तविकता को ही उजागर करता है। नीतिश कुमार के लिए लालू की यह टिप्पणी एकदम सटीक जान पड़ती है कि मोदी और शाह अपने नए सहयोगी जदयू और उसके प्रमुख नीतिश कुमार के सामने झुकने वाले नहीं है। दरअसल नीतिश कुमार भी इस कड़वी हकीकत से वाकिफ हो चुके हैं कि भाजपा जब तक उन्हें अपने समर्थन की बैसाखियों उपलब्ध कराती रहेगी तभी तक वे मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं इसलिए उनहें आगे चलकर अनेक समझौते करने की विवशता का सामना करना पड़ सकता है। नीतिश कुमार जैसे चतुर राजनेता इस सच्चाई को नजरअंदाज कर सकते हैं कि अतीत में उन्होंने नरेन्द्र मोदी सहित अनेक वरिष्ठ भाजपा नेताओं को जिस तरह अपमानित किया था वही अपमान के कड़वे घूंट पीने के लिए उन्हें तैयार रहना होगा।
जदयू की भांति ही एक अन्य घटक शिवसेना को भी केन्द्रीय मंत्रिमंडल के इस पुनर्गठन में निराश हाथ लगी है। मोदी मंत्रिमंडल में और प्रतिनिििधत्व पाने की आस लगाई बैठी शिवसेना की मोदी सरकार में केवल एक ही मंत्री पद से संतोष करना पड़ रहा है। केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शिवसेना के एक मात्र सदस्य के रूप में भारी उद्योग मंत्री अनंत गीते शामिल है। शिवसेना भी प्रधानमंत्री व भाजपा अध्यक्ष के विरूद्ध तल्ख टिप्पणियां करती रही हैं। इस बार के फेरबदल में भी उसे अगर अपना प्रतिनिधित्व बढऩे से वंचित रहना पड़ा है तो शिवसेना को भी यह बात अच्छी तरह समझ लेना चाहिए कि भाजपा के साथ मधुर संबंध बनाए बिना उसे वह सम्मान हासिल नहीं हो सकता जो स्व. बाला साहेब के जीवनकाल में उसने अर्जित किया था। शिवसेना आखिर इस हकीकत को कैसे नकार सकती है कि उसके पास स्व. बाला साहेब ठाकरे के कद का कोई नेता नहीं है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मंत्रिमंडल के तीसरे फेरबदल में चार राज्य मंत्रियों को प्रमोट कर केबिनेट मंत्री बनाया है तो इसका सीधा सा तात्पर्य यहीं है कि प्रधानमंत्री उनके प्रदर्शन से प्रसन्न हैं। निर्मला सीतारमण के अलावा बाकी तीन राज्यमंत्री धर्मेंद्र प्रधान, पीयुष गोयल और मुख्तार अब्बास नकवी अभी तक अपने मंत्रालयों का स्वतंत्र प्रभार संभाल रहे थे परंतु अब उन्हें अपने मंत्रालय में ही केबिनेट मंत्री के रूप में पदोन्नत कर उनके कद में इजाफा कर दिया गया है। धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलिय मंत्रालय के केबिनेट मंत्री के रूप में कौशल विकास की भी जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी तरह पीयुष गोयल को कोयला मंत्रालय के केबिनेट मंत्री के रूप में रेलवे का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। मुख्तार अब्बास नकवी अब केबिनेट मंत्री के रूप में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे। निश्चित रूप से इन सभी मंत्रियों की कार्यक्षमता से प्रधानमंत्री विशेष प्रभावित दिखाई देते हैं। पीयुष गोयल ने कोयला मंत्रालय में परदर्शिता कायम की है तो धर्मेंद्र प्रधान पर प्रधानमंत्री ने भरोसा जताया है कि कौशल विकास के ड्रीम प्रोजेक्ट को पूर्ण करने की उनमें अपेक्षित क्षमता है। मुख्तार अब्बास नकवी ने पार्टी की नीतियों एवं कार्यक्रमों के प्रति जो अटूट निष्ठा प्रदर्शित की है उसका उन्हें केबिनेट मंत्री बनाकर पुरस्कार दिया गया है। वे इसके हकदार भी थे। रेलमंत्री के रूप में रेलवे की कार्य प्रणाली में अपेक्षित सुधार लाने तथा रेल दुर्घटनाओं की रोकथाम में अपनी असफलता के लिए खुद को नैतिक रूप से जिम्मेदार मानते हुए सुरेश प्रभु ने अपने पद से इस्तीफे की पेशकश की थी जिस पर प्रधानमंत्री ने उन्हें प्रतीक्षा करने के लिए कहा था। सुरेश प्रभु से यद्यपि रेल मंत्रालय तो वापिस ले लिया गया है परंतु अब उन्हें महत्वपूर्ण वाणिज्य मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंप दी गई है, जिसका यह निष्कर्ष निकाला जा सकता है कि वाणिज्य मंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह बेहतर ढंग से कर सकेंगे। पीयुष गोयल के पास अब रेल मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी आने से निश्चित रूप से उनका कद बढ़ा है। रेलवे की कार्यप्रणाली में सुधार लाने तथा बढ़ती रेल दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए उन्हें कड़े फैसले लेने होंगे। वे रेलमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाने में सफल रहे तो निश्चित रूप से भारतीय रेल को नई दिशा देने में सफल हो सकते है। इससे प्रधानमंत्री का तो उन पर भरोसा मजबूत होगा ही साथ ही देशवासियों के मन में भी भारतीय रेल से सुरक्षित सफर कर पाने की उम्मीदें वापिस लौटेगी। रेलवे की कार्यप्रणाली से भी जनता को गहरी निराशा है। इस हकीकत से पीयुष गोयल भली भांति अवगत होंगे। देखना यह है कि वे सक्षम कोयला मंत्री की इमेज को रेल मंत्रालय में भी किस तरह बनाए रख पाते हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री के बुलेट ट्रेन के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को साकार करने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई है। ऊर्जा और कोयला मंत्रालय में अनूठी कार्यक्षमता से उन्होंने प्रधानमंत्री पर विशेष छाप छोड़ी है यहीं कारण हे कि प्रधानमंत्री ने उन्हें भारतीय रेल के कायाकल्प की जिम्मेदारी सौंपी है।
मोदी मंत्रिमंडल से केन्द्रीय मंत्री उमा भारती के इस्तीफे की खबरे मात्र अफवाह साबित हुई हैं। उन्होंने इस बारे में पूछे जाने पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया था। उनका मंत्री पद बरकरार है परंतु उनसे जल संसांधन नदी विकास व गंगा पुनर्जीवन की जिम्मेदारी वापिस लेकर सडक़ परिवहन, राजमार्ग व जहाजरानी मंत्री नीतिन गडक़री को सौंप दी गई है जो गडक़री की कार्यक्षमता में प्रधानमंत्री के बढ़ते भरोसे का परिचायक है। उमा भारती के पास अब स्वच्छता व पेयजल विभाग है। राष्ट्रीय स्वच्छता मिशन की महत्वाकांक्षी योजना को देखते हुए उमा भारती के पास अभी भी करने के लिए बहुत कुछ हैं। यहीं स्थित देश में पेयजल की उपलब्धता की भी है। उमा भारती के पास अगर मंत्री पद बरकरार है तो उन्हें अपनी अनूठी कार्यक्षमता पदर्शित कर मंत्री पद पर अपना अधिकार सुरक्षित रखना होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मंत्रिमण्डल के तीसरे फेरबदल में जिन नौ नए राज्यमंत्रियों को सरकार में शामिल किया है उनमें चार राज्यमंत्री हरदीप सिंहपुरी, आरके सिंह, अल्फोंस कन्नन थनम तथा सत्यपाल सिंह के पास दीर्घकालीन प्रशासनिक अनुभव है। प्रधानमंत्री ने उनके अनुभव का लाभ लेने की मंशा से उन्हें अपनी सरकार में शामिल किया है। इनमें हरदीप सिंह पुरी अमेरिका सहित अन्य देशों में भारतीय राजनयिक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। शहरी विकास से जुड़ी संस्थाओं के साथ कार्य करने का उन्हें अच्छा अनुभव है, इसलिए उन्हें आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को पूरा करने की दिशा में उनके अनुभव का लाभ मिलने की उम्मीद की जा सकती है। आरके सिंह को नवीन ऊर्जा मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है और अल्फोंस कन्नन थनम पर्यटन, इलेक्टानिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की जिम्मेदारी स्वतंत्र प्रभारी राज्य मंत्री के रूप में सभालेंगे। सरकार में वरिष्ठ पदों पर रहते हुए उन्होंने जो अनुभव किया है उसका पूरा पूरा उपयोग वे सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को मूर्तरूप देने मेें कर सके तो निश्चित रूप से प्रधानमंत्री का प्रयोग सफल माना जाएगा।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2004 के ओलंपिक में रजत पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ी राज्यवर्धन राठौर को अपनी सरकार में पहले ही शामिल कर लिया था परंतु उन्हें खेल मंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपकर उन्हें उनकी रूचि का मंत्रालय इसी उम्मीद के साथ सौंपा है कि वे इस मंत्रालय में बेहतर ढंग से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर सकेंगे। स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार यह हुआ है कि किसी ओलंपिक विजेता को राज्यमंत्री के रूप में खेलमंत्रालय का स्वतंत्र प्रभार सौंपा गया है। प्रधानमंत्री के इस फैसले से निश्चित रूप से खेल जगत में यह संदेश गया होगा कि सरकार खिलाडिय़ों की समस्याओं को एक खिलाड़ी की नजर से देखने में विश्वास रखती है। राज्यवर्धन राठोर के पास खेल मंत्रालय की जिम्मेदारी आने से पहले विजय गोयल के पास थी। विजय गोयल अब संसदीय मामलों, सांख्यिकी व कार्यक्रम क्रियान्वयन विभाग की जिम्मेदारी राज्यमंत्री के रूप में सभालेंगे। खेल मंत्री के रूप में अगर राज्यवर्धन राठोर खिलाडिय़ों की समस्याओं के निराकरण व खेल संस्थाओं में व्याप्त राजनीति के उन्मूलन के लक्ष्य में सफल हो सके तो यह उनकी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाएगी जिसके लिए मोदी भी सराहना के हकदार होंगे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कार्यशैली हमेशा ही पूर्व प्रधानमंत्रियों से काफी हद तक अलग रही है। वे लीक से हटकर चलने में विश्वास करते रहे है और उनके हर फैसले में उनकी कार्यशैली की यह विशेषता स्पष्ट देखी जा सकती है। प्रधानमंत्री मोदी की मर्जी के बिना सरकार या संगठन कही भी पत्ता भी नहीं हिल सकता फिर केन्द्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल तो उनका विशेषाधिकार है और इस विशेषाधिकार का इस्तेमाल करते समय उनके मन में केवल ही एक बात होती है कि सरकार को किस तरह देश की सवा सौ करोड़ जनता की अपेक्षओं के अनुरूप बनाया जाए। मंत्रीमंडल का यह पुनर्गठन भी यही संदेश देता है।
कुल मिलाकर केन्द्रीय मंत्रिमंडल में यह फेरबदल सरकार की कार्यकुशलता बढ़ाने के साथ और भी कई उद्देश्यों की पूर्ति के लिए किया गया है। एक ओर जहां राजग के घटक दलों को सचेत करने की मंशा इसमें छिपी हुई है वहीं दूसरी ओर अगले साल होने जा रहे 10 राज्य विधानसभाओं के चुनावों भाजपा की जीत की संभावनाओं को बलवती बनाने में भी यह पुनर्गठन महत्वपूर्ण कारक सिद्ध होगा। देश की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक कुशल महिला मंत्री के कंधों पर डालकर देश की महिलाओं में भी एक सकारात्क संदेश देने का प्रयास प्रधानमंत्री ने किया है। चूंकि दक्षिण से आने वाले भाजपा के वरिष्ठ नेता वैंकेया नायडू को अब उप राष्ट्रपति पद से नवाज दिया गया है इसलिए दक्षिण में प्रभाव बढ़ाने की दृष्टि से भी निर्मला सीतारमण की यह ऐतिहासिक पदोन्नति का अपना अलग महत्व है। वर्ष 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों के पूर्व यह केन्द्रीय मंत्रिमंडल में अंतिम फेरबदल माना जा रहा है परंतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की चौंकाने वाली कार्यशैली को देखते हुए एक और फेरबदल की संभावनाओं से एकदम खारिज भी नहीं किया जा सकता।

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