अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण जल्द हो : स्वामी स्वरूपानंद

बिलासपुर(सुदीप्तो चटर्जी) : ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा की अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि में अविलम्ब भव्य राम मंदिर का निर्माण हो। सरकार को इस मुद्दे को राजनीतिकरण न कर जल्द से जल्द राम मंदिर का निर्माण करवाना चाहिए। यह सभी हिंदुओं , साधू -संतों , महात्माओं के आस्था का प्रश्न है की न्यायलय के फैसले के बाद भी राम जन्म भूमि में राम मंदिर का निर्माण अभी तक क्यों नहीं हुई।

आगे शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा की स्कन्दपुराण में भी श्री राम के अवतार के  रूप में जन्म लेने का उल्लेख है। उनहोंने यह भी कहा की राम जन्म भूमि के दर्शन मात्र से ही लोगों को आशिर्वाद अनायास ही प्राप्त हो जाते हैं और पाप धूल  जाते हैं । स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने यह भी कहा की जितने जन्म स्थान हैं वहां सभी देवताओं का वास होता है , इसलिए जो लोग अयोध्या जाते हैं उन्हें अवश्य राम जन्म भूमि का दर्शन करना चाहिए जिससे उन्हें सभी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हो सके। उनहोंने आगे बातचीत में कहा की राजा विक्रमादित्य ने भी वहां भव्य मंदिर का निर्माण किया था। उनहोंने कहा हनुमान जी के मंदिर , चौखट , तथा प्राचीन मंदिर के अवशेष  वहाँ पर थे। जब विवाद हुआ उस समय इमारत को तोड़ दिया गया लेकिन वह इमारत मस्जिद नहीं बल्कि मंदिर था जिसे तोड़ा गया था। स्वरूपानंद सरस्वती जी ने यह भी कहा की जब नरसिंह राव जी प्रधानमन्त्री थे उनहोंने जन्मभूमि सहित ६५ एकड़ जमीन अधिग्रहण किया और यह घोषणा की कि यह संपत्ति सरकारी भूमि हो गयी है, महात्मा लोग चाहेंगे तो मंदिर बनाने के लिए हम दे देंगे।

स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने यह भी कहा की हमने , कांची एवं पूरी के शंकराचार्य से भी कहा और भारत सरकार से अनुरोध किया की रामलला के लिए भूमि दिया जाए जिससे हम मिलकर वहां राम मंदिर का निर्माण कर सके। हमने रामालय ट्रस्ट भी बनाया जो अभी भी जीवित है। जो भूमि विवादित थी उसमे अदालत का स्टे था और यह भी कहा गया था की जब तक कोई निर्णय न हो जाए तब तक किसी को न दिया जाए। हमने सभी महात्माओं का बहुत विशाल सम्मेलन किया और राम जन्म भूमि के उद्धार हेतु शंखनाद किया।  इलाहाबाद उच्च न्यायलय का निर्णय हमारे पक्ष में आया और अधिवक्ता पी.एन.मिश्रा  एवं रंजना अग्निहोत्री हमारे पक्षकार थे। साथ ही शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने यह भी कहा की  बाबर के न आने का कोई प्रमाण है और न ही बाबर द्वारा मस्जिद बनाने के कोई प्रमाण है। जब न्यायालय का फैसला हमारे हक में है और न्यायलय कह रही है की बाहर समझौता कर निर्णय ले लिया जाए तब सरकार को इसे और राजनीतिकरण न कर जल्द से जल्द भव्य राम मंदिर का निर्माण आयोध्या के राम जन्म भूमि में करने की  पहल करे।

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