देश भर में चल रहे 50 करोड़ के नकली सिक्के

चंडीगढ़. हरियाणा में स्पेशल सेल ने उपकार लूथरा नामक शख्स को गिरफ्तार किया है. उसके पास से 8500 रुपए के नकली सिक्के बरामद हुए हैं. शुरुआती पूछताछ में लूथरा ने बताया है कि उसकी गैंग बीते सालों में 50 करोड़ रुपए के सिक्के देशभर में चला चुकी है. गैंग नेपाल से ऑपरेट की जा रही थी और मुख्यरूप से उत्तर भारत में उसने ये सिक्के चलाए हैं.

लूथरा पर अपने बिजनेस पार्टनर की हत्या का आरोप है और उस पर एक लाख रुपए का इनाम था. इसके पहले अक्टूबर 2016 में पुलिस ने गुलशन गंभीर और सचिन नामके आरोपियों को गिरफ्तार किया था तथा नकली सिक्के बनाने की फैक्टरी पर छापा भी मारा था. तब खुलासा हुआ था कि इस गैंग के पीछे लूथरा भाइयों का हाथ है.

स्पेशल सेल के अधिकारियों ने बताया कि नकली सिक्कों की बड़ी खेप को टोल प्लाजा पर खपाया जाता था. अब जांच की जा रही है कि सबसे अधिक नकली सिक्के कौन-कौन से टोल प्लाजा में खपाए गए और क्या वहां के कर्मचारियों की भी इसमें मिली-भगत है.

शुरुआती जांच में पुलिस अधिकारियों ने पाया है कि ये सिक्के इतनी अच्छी क्वालिटी के होते थे कि नकली और असली में फर्क करना मुश्किल है. फर्जीवाड़े में लूथरा अकेला नहीं था. धंधा फैलने पर उसने अन्य लोगों के माध्यम से अपनी ब्रांच खोलनी शुरू कर दी थी. उनसे यह महीने के आधार पर कुछ पैसा लेता था और बदले में नकली सिक्के बनाने के लिए डाई आदि उन्हें उपलब्ध कराता था.

हरियाणा में स्पेशल सेल ने उपकार लूथरा नामक शख्स को गिरफ्तार किया है. उसके पास से 8500 रुपए के नकली सिक्के बरामद हुए हैं. शुरुआती पूछताछ में लूथरा ने बताया है कि उसकी गैंग बीते सालों में 50 करोड़ रुपए के सिक्के देशभर में चला चुकी है. गैंग नेपाल से ऑपरेट की जा रही थी और मुख्यरूप से उत्तर भारत में उसने ये सिक्के चलाए हैं.

लूथरा पर अपने बिजनेस पार्टनर की हत्या का आरोप है और उस पर एक लाख रुपए का इनाम था. इसके पहले अक्टूबर 2016 में पुलिस ने गुलशन गंभीर और सचिन नामके आरोपियों को गिरफ्तार किया था तथा नकली सिक्के बनाने की फैक्टरी पर छापा भी मारा था. तब खुलासा हुआ था कि इस गैंग के पीछे लूथरा भाइयों का हाथ है.

स्पेशल सेल के अधिकारियों ने बताया कि नकली सिक्कों की बड़ी खेप को टोल प्लाजा पर खपाया जाता था. अब जांच की जा रही है कि सबसे अधिक नकली सिक्के कौन-कौन से टोल प्लाजा में खपाए गए और क्या वहां के कर्मचारियों की भी इसमें मिली-भगत है. असली-नकली का फर्क करना मुश्किल शुरुआती जांच में पुलिस अधिकारियों ने पाया है कि ये सिक्के इतनी अच्छी क्वालिटी के होते थे कि नकली और असली में फर्क करना मुश्किल है.

फर्जीवाड़े में लूथरा अकेला नहीं था. धंधा फैलने पर उसने अन्य लोगों के माध्यम से अपनी ब्रांच खोलनी शुरू कर दी थी. उनसे यह महीने के आधार पर कुछ पैसा लेता था और बदले में नकली सिक्के बनाने के लिए डाई आदि उन्हें उपलब्ध कराता था.

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