नई दिल्ली। राष्ट्रपति चुनाव की सियासत में मिली मात से सबक लेते हुए 18 विपक्षी दलों ने आम सहमति से महात्मा गांधी के पौत्र गोपाल कृष्ण गांधी को उपराष्ट्रपति पद के लिए विपक्ष का संयुक्त उम्मीदवार बनाने का एलान कर दिया है।

इस फैसले के बाद उपराष्ट्रपति चुनाव में सरकार और विपक्ष के बीच आम सहमति की गुंजाइश खत्म हो गई है। राष्ट्रपति चुनाव में राजग का साथ देने वाले जदयू ने उपराष्ट्रपति चुनाव की इस बैठक में शामिल होकर विपक्षी खेमे को बड़ी राहत दी है।

वैसे यह काबिले गौर है कि पहले कांग्रेस छोड़ बाकी विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति उम्मीदवार के रूप में भी गोपाल गांधी के नाम पर सहमति बनाने की कोशिश की थी। उस फैसले में जदयू भी शामिल था।

उपराष्ट्रपति चुनाव पांच अगस्त को होना है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की अगुआई में संसद भवन परिसर में विपक्षी नेताओं की बैठक में उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार तय किया गया।

बैठक के बाद इसकी घोषणा सोनिया गांधी ने की। कांग्रेस ने पहले से ही तय कर लिया था कि विपक्षी एकता की खातिर वह अपने चेहरे को नहीं बल्कि दूसरे विपक्षी दलों की पसंद को तवज्जो देगी।

वैसे गांधी के रिश्ते कांग्रेस से भी अच्छे रहे हैं और संप्रग-1 सरकार ने ही उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया था। गोपाल गांधी का नाम तय करने में केवल 15 मिनट लगे क्योंकि उनके अलावा किसी दूसरे चेहरे की चर्चा भी नहीं हुई।

गोपाल गांधी को उम्मीदवार बनाने का प्रस्ताव सबसे पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के डेरेक ओब्रायन ने रखा। टीएमसी की मुख्य विरोधी माकपा के नेता सीताराम येचुरी और बसपा के सतीश मिश्र ने सबसे पहले इसका समर्थन किया।

इसके बाद तो सभी दलों ने मुहर लगा दी। बैठक खत्म होने के बाद उम्मीदवारी के नामांकन प्रस्ताव पर तत्काल हस्ताक्षर भी कर दिए गए। जदयू की ओर से शरद यादव ने हस्ताक्षर किए। नाम की घोषणा के बाद गोपाल गांधी ने कहा कि वे पूरी गंभीरता से चुनाव लड़ेंगे।

हालांकि विपक्षी खेमा इस बात से भी भलीभांति वाकिफ है कि आंकड़ों के गणित में उपराष्ट्रपति चुनाव में सत्तारूढ़ राजग को अपने उम्मीदवार को जिताने में मुश्किल नहीं होने वाली।