लखनऊ : लखनऊ मेट्रो का उद्धाटन हो चुका है. उद्घाटन पर राजनीति भी हो चुकी है. श्रेय लूटने का युद्ध भी हो चुका है. मेट्रो खराब भी हो चुकी है. इस बीच कुछ ऐसा भी हुआ जो नहीं होना चाहिए था. लखनऊ मेट्रो परियोजना के सफल होने का श्रेय जिस व्यक्ति को सबसे पहले जाना चाहिए वह हैं देश के ‘मेट्रो मैन’ और लखनऊ मेट्रो के चीफ एडवाइजर ई श्रीधरन.

इनके ही नेतृत्व में पूरी मेट्रो टीम ने काम किया और यूपी को ये सुंदर सौगात दी. लेकिन, मेट्रो के ऐतिहासिक उद्धाटन में ऐन वक्त श्रीधरन पीछे छूट गए और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और गृह मंत्री राजनाथ सिंह समेत तमाम नेताओं ने बटन दबाकर मेट्रो का उद्धाटन कर दिया.

मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि मंच पर श्रीधरन की कुर्सी का क्रम ही कुछ ऐसा था. और उद्धाटन की हड़बड़ी में उनकी ओर किसी का ध्यान नहीं गया. वजह जो भी हो यह स्पष्ट है कि यह भूल अगर हुई तो श्रेय लेने के होड़ में ही हुई है. जिस दिमाग ने नवाबों के शहर में मेट्रो पहुंचाई, जिसने लखनऊ को नई रफ्तार दी वही कुछ कदमों से पीछे रह गया. गौर से देखें तो यह महज एक तस्वीर है लेकिन यह बहुत कुछ कह जाती है. किसी बेहतर काम में, विकास के काम में, राजनीति किस कदर हावी होती है यह उसकी बानगी भर है.

इस तस्वीर के सोशल मीडिया पर आते ही विपक्षी दलों ने जहां फिर से बीजेपी पर हमला बोला तो वहीं तमाम जागरुक नागरिकों ने भी अपने ‘मन की बात’ शेयर की. गौरतलब है कि इस उद्धाटन को लेकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनकी पार्टी पहले से ही बीजेपी पर निशाना साधे हुए हैं. उनके मुताबिक मेट्रो का उद्धाटन सपा सरकार में ही हो चुका था. योगी सरकार ने मेट्रो का दोबारा उद्धाटन किया है.

अंत में सपा मुखिया अखिलेश यादव का एक ट्वीट जिसमें मेट्रो मैन की अहमियत साफ झलकती है. अखिलेश ने लिखा, “‘लखनऊ मेट्रो’ ज़िंदगी आसान बनायेगी, लोगों को श्रीधरन जी और उस टीम की याद दिलायेगी जिसने हमारे इस सपने को सच कर दिखाया. सबको धन्यवाद और बधाई!”