रायपुर, 26 जुलाई 2026/ पवित्र श्रावण मास में भगवान भोलेनाथ के प्रति अटूट आस्था और श्रद्धा का प्रतीक अमरकंटक से भोरमदेव मंदिर तक लगभग 120 किलोमीटर की कांवड़ यात्रा हर वर्ष हजारों शिवभक्तों द्वारा की जाती है। इस दौरान श्रद्धालु अमरकंटक से पवित्र जल लेकर पैदल यात्रा करते हुए ऐतिहासिक एवं धार्मिक महत्व वाले भोरमदेव मंदिर पहुंचते हैं और भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।
सभी हैंडपंपों का क्लोरीनेशन एवं खराब या बंद हैंडपंप का हुआ तत्काल सुधार
श्रद्धालुओं की इस कठिन लेकिन आस्था से परिपूर्ण यात्रा को सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की पहल पर जिला प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारियां सुनिश्चित की गई हैं। विभिन्न विभागों के समन्वय से यात्रा मार्ग पर आवश्यक मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त किया गया है, ताकि किसी भी शिवभक्त को असुविधा का सामना न करना पड़े। यात्रा के दौरान पेयजल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने कांवड़ मार्ग में स्थित सभी हैंडपंपों का क्लोरीनेशन कराया है। साथ ही जो हैंडपंप खराब या बंद पाए गए थे, उनका तत्काल सुधार एवं मरम्मत कर उन्हें सुचारु रूप से चालू कराया गया है।
पानी की गुणवत्ता एवं उपलब्धता हेतु नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश
भोरमदेव मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में भी पेयजल व्यवस्था का निरीक्षण कर आवश्यक सुधार किए गए हैं। पानी की गुणवत्ता एवं उपलब्धता बनाए रखने के लिए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश दिए गए हैं, जिससे यात्रा के दौरान किसी प्रकार की जल संबंधी समस्या उत्पन्न न हो।
यात्रा अवधि के दौरान पूरी सतर्कता के साथ करें कार्य
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के निर्देश पर स्वास्थ्य, स्वच्छता, पेयजल एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर लगातार नजर रखी जा रही है। आयोजन समिति, संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे यात्रा अवधि के दौरान पूरी सतर्कता के साथ कार्य करें और श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधा उपलब्ध कराएं।
सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर हों पूर्ण – उप मुख्यमंत्री
श्री विजय शर्मा ने कहा है कि श्रावण माह में भोरमदेव आने वाले प्रत्येक शिवभक्त की सुविधा और सुरक्षा प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि यात्रा मार्ग पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय पर पूर्ण हों तथा श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न होने पाए।

