लखनऊ (SHABD) :योगी सरकार द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नशामुक्त भारत के आह्वान को जनआंदोलन का स्वरूप देते हुए तथा ‘विकसित भारत-विकसित उत्तर प्रदेश’ के संकल्प को साकार करने के प्रदेश के युवाओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने और समाज में नशा मुक्ति का संस्कार विकसित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान को उच्च शिक्षा संस्थानों के माध्यम से प्रभावी बनाया जा रहा है।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने मंगलवार को लखनऊ स्थित विधानसभा कार्यालय में नशा मुक्ति अभियान की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में नियमित जागरूकता गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए। बैठक में प्रमुख सचिव, विशेष सचिव, निदेशक उच्च शिक्षा सहित विभागीय अधिकारी तथा राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों के कुलपति, कुलसचिव एवं अन्य अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए।
उच्च शिक्षा मंत्री ने निर्देश दिए कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा नशा मुक्ति अभियान की निगरानी के लिए अधिकारियों को विभिन्न क्षेत्रों में जिम्मेदारी दी जाए। प्रत्येक विश्वविद्यालय में एक नोडल अधिकारी तथा प्रत्येक महाविद्यालय एवं फैकल्टी स्तर पर भी नोडल अधिकारी नामित किए जाएं, ताकि अभियान का प्रभाव अंतिम छोर तक पहुंचे और गतिविधियों की नियमित निगरानी हो सके। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों में पहले से कराए गए निरीक्षणों और जांचों की रिपोर्ट भी विभाग को उपलब्ध कराई जाए। विशेष रूप से अधिक संख्या वाले छात्रावासों में नशे की रोकथाम के लिए किए गए प्रयासों की जानकारी संकलित की जाए।
मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में निर्देश दिए कि कक्षा शुरू होने से पहले विद्यार्थियों को नशा मुक्ति की संक्षिप्त शपथ दिलाई जाए। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन आधा से एक मिनट की शपथ का विद्यार्थियों के मन पर सकारात्मक मानसिक प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रत्येक सप्ताह कक्षा में कम से कम एक बार नशे के दुष्प्रभावों और नशा न करने के सकारात्मक प्रभावों पर शिक्षकों द्वारा संक्षिप्त व्याख्यान दिया जाए। इसके लिए सप्ताह का एक दिन निर्धारित किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि लगातार संवाद और जागरूकता से विद्यार्थियों में नशे के प्रति दृढ़ नकारात्मक सोच विकसित होगी। मंत्री उपाध्याय ने कहा कि नशा मुक्ति अभियान को विद्यार्थियों की रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाए। नशे के दुष्प्रभावों और नशा मुक्त जीवन के लाभों पर निबंध लेखन, कहानी, चित्रकला, पोस्टर एवं अन्य रचनात्मक प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं। समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों एवं विशेषज्ञों को बुलाकर विद्यार्थियों के लिए व्याख्यान भी आयोजित किए जाएं। विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय परिसरों में छोटी-छोटी नशा मुक्ति पदयात्राएं निकालने के निर्देश भी दिए गए।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक फैकल्टी या विभाग के स्तर पर भी सीमित अवधि की पदयात्रा आयोजित की जा सकती है, जिससे विद्यार्थियों में जागरूकता का निरंतर वातावरण बने। उन्होंने परिसरों के अंदर और आवश्यकता के अनुसार बाहर भी नशा मुक्ति से संबंधित होल्डिंग, पोस्टर और दीवार लेखन कराने के निर्देश दिए, ताकि संदेश विद्यार्थियों और आमजन तक लगातार पहुंचता रहे।
उच्च शिक्षा मंत्री ने छात्रावासों में नशे की रोकथाम के लिए प्रभावी निगरानी व्यवस्था बनाने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि बाहर से छात्रावास में आने वाली सामग्री की गेट स्तर पर आवश्यक जांच की जाए और वार्डन एवं संबंधित अधिकारियों द्वारा समय-समय पर आकस्मिक निरीक्षण किया जाए।उन्होंने कहा कि छात्रावासों में किसी प्रकार की नशीली सामग्री के उपयोग की संभावना को प्रारंभिक स्तर पर ही रोकना जरूरी है। विद्यार्थियों को दंडात्मक दृष्टिकोण के बजाय समझाकर नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया जाए।
उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि नशा मुक्ति का संदेश तभी प्रभावी होगा, जब यह विद्यार्थियों के दैनिक जीवन और व्यवहार का हिस्सा बने। उन्होंने कहा कि निरंतर शपथ, व्याख्यान, संवाद और रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से ही इसे स्थायी संस्कार में बदला जा सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को नशे से बचाने में शिक्षा क्षेत्र की बड़ी जिम्मेदारी है। संस्कारयुक्त शिक्षा के माध्यम से ही युवाओं को स्वस्थ, जिम्मेदार और राष्ट्र निर्माण के लिए तैयार किया जा सकता है।

