घाटकुसुंभा (SHABD) :जिले के घाटकुसुंभा प्रखंड में गंगा की सहायक हरुहर नदी के उफान के कारण प्रखंड के 22 गांव जलमग्न हैं। हालांकि, गंगा के जलस्तर में कमी आने के साथ हरुहर नदी का जलस्तर भी घट रहा है। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में जलजमाव बना हुआ है, जिससे पशुपालक किसानों को मवेशियों के स्वास्थ्य को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जलजमाव वाले क्षेत्रों में मवेशियों के बीमार होने की सूचना के बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर पशुपालन विभाग ने उपचार की व्यवस्था तेज कर दी है। विभाग की मोबाइल वेटरनरी यूनिट गांव-गांव पहुंचकर बीमार मवेशियों की जांच और उपचार कर रही है। इससे पशुपालक किसानों को अपने पशुओं को इलाज के लिए दूर ले जाने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है।
पशुपालक किसान मोहित कुमार ने बताया कि उनकी बकरी दो दिनों से बीमार थी। गांव पहुंची मोबाइल वेटरनरी यूनिट के चिकित्सक ने बकरी का उपचार किया। उन्होंने कहा कि गांव में ही पशुओं का इलाज उपलब्ध होना पशुपालकों के लिए काफी सुविधाजनक है। उन्होंने बताया कि गांव के कई अन्य मवेशियों का भी मोबाइल वेटरनरी यूनिट के माध्यम से उपचार किया गया है।
मोबाइल वेटरनरी यूनिट के चिकित्सक ने बताया कि जिला प्रशासन के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर बीमार मवेशियों का उपचार किया जा रहा है। इस दौरान पशुओं में डायरिया, बुखार और भूख नहीं लगने जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं। चिकित्सकों की टीम आवश्यक जांच के बाद पशुओं का उपचार कर रही है।
प्रभारी भ्रमणशील चिकित्सा पदाधिकारी ने बताया कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए जिले की मोबाइल वेटरनरी यूनिटों को पंचायत स्तर पर तैनात किया गया है। करीब पांच से छह मोबाइल वेटरनरी यूनिट गांव-गांव पहुंचकर पशुपालकों के बीमार मवेशियों का इलाज कर रही हैं। उन्होंने कहा कि गांव में ही पशु चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने से पशुपालकों को काफी लाभ मिल रहा है।
पशुपालन विभाग की इस पहल से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पशुपालकों को राहत मिली है। जलजमाव के बीच मवेशियों के उपचार की सुविधा गांव में उपलब्ध होने से पशुपालक किसान प्रशासन और विभाग की व्यवस्था से संतुष्ट नजर आ रहे हैं।

