बस्तर के ढोकरा शिल्प को मिलेगी राष्ट्रीय पहचान

रायपुर, 10 अक्टूबर 2026 : बस्तर की सुप्रसिद्ध पारंपरिक ढोकरा (बेलमेटल) कला को अब राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने जा रही है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा देश भर में ट्राइबल आर्टिजन क्लस्टरों को प्रीमियम क्लस्टर के रूप में विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत बस्तर के ढोकरा क्लस्टर चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

इसी सिलसिले में कलेक्टर श्री आकाश छिकारा के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन के समन्वय से मंत्रालय की एक उच्च स्तरीय टीम ने बस्तर जिले के जगदलपुर विकासखंड के ग्राम चिलकुटी का दौरा कर जमीनी स्तर पर संभावनाओं का जायजा लिया। इस केंद्रीय दल का नेतृत्व मंत्रालय के अवर सचिव डॉ. सुधीर कुमार कर रहे थे, जिनके साथ प्रोजेक्ट एसोसिएट व सलाहकार सुश्री नौरिन शाहिद और क्लस्टर डेवलपमेंट एक्सपर्ट श्री जागेश्वर भी शामिल रहे।

आदिवासी विकास विभाग और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के संयुक्त समन्वय से आयोजित इस भ्रमण के दौरान अधिकारियों ने स्थानीय आदिवासी शिल्पकार परिवारों से सीधी चर्चा की। दल ने ढोकरा शिल्प तैयार करने की जटिल और पारंपरिक प्रक्रिया जैसे मोम से बारीक सांचे बनाना, मिट्टी का लेप चढ़ाना और फिर धातु ढलाई को बेहद नजदीक से देखा और समझा। इसके साथ ही टीम ने वन विभाग द्वारा कारीगरों के लिए तैयार किए गए सामुदायिक भवन में चल रही गतिविधियों का भी सूक्ष्म अवलोकन किया।

मंत्रालय की मंशा चिलकुटी को एक समग्र मॉडल प्रीमियम क्लस्टर के रूप में स्थापित करने की है। इसके तहत एक वर्षीय कार्ययोजना बनाकर एक ही एकीकृत परिसर में अत्याधुनिक ढोकरा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, मटेरियल स्टोर और इन्वेंट्री मैनेजमेंट सिस्टम तैयार किया जाएगा। साथ ही उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार के साथ-साथ उनकी ब्रांडिंग और पैकेजिंग को आधुनिक बाजार के अनुरूप ढाला जाएगा। इस योजना के अंतर्गत बस्तर कला गुड़ी एक्सपीरियंस जोन को एक सशक्त मार्केटिंग हब के रूप में भी विकसित किया जा रहा है, जिससे पारंपरिक शिल्पकारों को सीधे राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जा सकेगा।

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