06 वर्षों में 416 जनसुनवाई, 6463 प्रकरण दर्ज, 6184 का निराकरण: छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग का दावा

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने अपने लगातार दो कार्यकाल के छह वर्ष पूरे होने पर आयोग की उपलब्धियों का ब्यौरा जारी किया। जारी प्रेस नोट में बताया गया कि छह वर्षों के दौरान आयोग ने पूरे प्रदेश में 416 जनसुनवाई आयोजित कर महिलाओं को त्वरित न्याय उपलब्ध कराने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है।

प्रेस नोट के अनुसार, 23 जुलाई 2020 से 22 जुलाई 2023 तक पहला कार्यकाल तथा 21 जुलाई 2023 से 20 जुलाई 2026 तक दूसरा कार्यकाल रहा। डॉ. नायक ने बताया कि उनके पद से संबंधित मामला वर्तमान में उच्च न्यायालय में लंबित है और अंतिम न्यायिक निर्णय तक वे अध्यक्ष पद पर कार्यरत रहेंगी।

आयोग के अनुसार, छह वर्षों में कुल 6463 प्रकरण पंजीबद्ध हुए, जिनमें से 6184 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है। इन मामलों की सुनवाई के लिए 416 जनसुनवाई आयोजित की गईं, जिनमें दोनों पक्षों को सुनकर लगभग 20 हजार से अधिक परिवारों को आयोग के समक्ष अपनी बात रखने का अवसर मिला।

छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने बताया कि आयोग ने प्रदेशभर में 36 मामलों में स्वतः संज्ञान लिया, जिनमें अधिकांश का निराकरण किया जा चुका है। कबीरधाम जिले के लोहारीडीह गांव में पुलिस अत्याचार के मामले में भी आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए 33 महिलाओं के बयान जेल जाकर दर्ज किए। इसके बाद संबंधित दस्तावेज राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजे गए हैं, जहां आगे की कार्रवाई की संभावना है।

महिलाओं में कानूनी जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोग ने मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ के माध्यम से 23 जिलों के 872 गांवों एवं शहरी क्षेत्रों में 217 दिनों तक अभियान चलाया। इस दौरान महिलाओं के कानूनी अधिकारों पर आधारित ऑडियो-वीडियो सामग्री एवं लघु फिल्मों के माध्यम से व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित किया गया, जिससे लाखों महिलाओं और बालिकाओं को लाभ मिलने का दावा किया गया है।

आयोग ने महिला सुरक्षा एवं अधिकारों के क्षेत्र में क्षमता विकास पर भी जोर दिया। चार संभागों एवं रायपुर में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में 2200 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए। प्रशिक्षण में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की कार्यप्रणाली, साइबर अपराध, मानव तस्करी निरोध, कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न (रोकथाम, प्रतिषेध एवं प्रतितोष) अधिनियम-2013 तथा महिला अपराध एवं साक्ष्य संकलन जैसे विषय शामिल रहे।

डॉ. किरणमयी नायक ने दावा किया कि आयोग ने छह वर्षों में प्रदेश के सभी 33 जिलों तक पहुंचकर महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया है तथा आयोग की जनसुनवाई व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।

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