रायपुर। वैदिक घनाद संस्थान के आचार्य कमलेश मिश्र यज्ञाचार्य ने आज रायपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों से चर्चा करते हुए बताया की वैदिक सनातन संस्कृति घनाद हमारी भारतीय संस्कृति का मूल आधार है। जिस पर सम्पूर्ण सृष्टि टिकी हुई है। उन्होंने कहा कि सनातन ही एकमात्र ऐसा समाधान है जिससे कि सबका विकास होगा जैसा कि हम पुराने कल से वसुदेव कुटुंबकम कहते आ रहे हैं। उन्होंने बताया की प्राचीन काल में गुरुकुल प्रणाली से निपुण संस्कारवान संतति से विश्व में भारत का नाम अपनी सभ्यता एवं संस्कृति को आलोकित करता रहा है। भारतीय प्राचीन संस्कृति में ज्योतिष वास्तु यज्ञ अनुष्ठान संस्कार कथा प्रवचन शांति सेवा और पवित्र पूजन पद्धति का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। आज विश्व में भारत अपनी सम्पन्न संस्कृति से पहचाना जाता है। आचार्य मिश्रा ने बताया कि आजकल के लोग सनातन से दूर होते जा रहे हैं जिसके कारण ही उनके जीवन में अनेक प्रकार के कष्ट और तकलीफें आ रही उन्होंने कहा कि यदि हमें अपने जीवन को सुंदर और व्यवस्थित बनाना है तो हमें सनातन की ओर ही वापस चलना होगा।
आचार्य मिश्र ने बताया कि वे विगत 30 वर्षों से वैदिक सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए देश-विदेश में प्रयासरत हैं। वैदिक मंत्रों एवं अनुष्ठानों का आयोजन भारत सहित विदेशों में भी कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि भारत में मुम्बई हैदराबाद, बैंगलोर, पटियाला, प्रयागराज, चंडीगढ़, सूरत, हरियाणा, इंदौर, गुडग़ांव लखनऊ आदि में निवासरत लाखों श्रद्धालु उनके जन जागरूकता अभियान से जुड़ चुके हैं।
उन्होंने बताया कि विदेशों में भारतीय संस्कृति के प्रति वहां निवासरत लोगों में काफी अनुराग है। दुबई, ओमान, वाशिंगठन, इग्लैण्ड, सिंगापुर में वैदिक घनाद आयोजन के दौरान वहां के निवासियों ने वैदिक ज्ञान को प्राप्त करने में अपनी रूचि का प्रदर्शन किया। संस्था का मूल उद्देश्य जनसामान्य में सनातन संस्कृति का प्रचार-प्रसार और जोडऩा है। संस्था की भावी योजनाएं, भावी पीढ़ी को मंत्रोच्चारण, नित्य कर्म पद्धति, श्लोक, वैदिक शिक्षा के अध्ययन के लिए प्रेरित करने के साथ ही उन्हें संस्कारवान बनाने के लिए शिक्षित करना है।
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