रायपुर: छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक, सदस्य श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 176 वी. एवं रायपुर जिले में 362 वी. जनसुनवाई की गई।
एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदक की मृत्यु 22 अगस्त 2024 में हो चुकी है और अनावेदक वित मंत्रालय नई दिल्ली में असिस्टेंट डायरेक्टर के पर पर शासकीय सेवा में कार्यरत् था तथा आवेदिका से उसका तलाक नहीं हुआ था। आवेदिका व अनावेदक 2021 से वैचारिक मतभेद के कारण अलग रह रहे थे। इसी बीच अनावेदक (पति) ने दूसरी महिला से विवाह कर लिया था वह दूसरा विवाह अवैधानिक होने से शून्य है। 2021 को महिला आयोग मे आवेदिका द्वारा लिखित शिकायत करने पर अनावेदक उपस्थित नहीं हुआ था, जिससे यह स्पष्ट हुआ कि आवेदिका अनावेदक के खिलाफ कानूनी कर्यवाही 2021 से प्रारंभ कर चुकी थी ऐसी दशा में आवेदिका विधिवन विवाहित पत्नी होने के अधिकार से अनावेक की एक मात्र उत्तराधिकारी है।
आयोग ने कहा वह अनावेदक के शासकीय नौकरी के एवज में अनुकंपा नियुक्ति की पात्रता रखती है तथा उसकी समस्त जमा राशि व पेंशन की भ हकदार है। आयोग ने आवेदिका को निर्देशित किया कि वह अपने समस्त अधिकारों के लिए कार्यवाही कर सकती है व आवेदिका अपने स्व. पति के समस्त वैधानिक उत्तराधिकार हक की सम्पत्ति को पाने की पात्रता रखती है तथा महिला आयोग की आर्डरशीट के आधार पर आवश्यकतानुसार दीवानी, राजस्व या आपराधिक हर प्रकार का प्रकरण दर्ज करा सकती है इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।
एक अन्य प्रकरण में उभय पक्ष को विस्तार से सुना गया उभय पक्ष आपस में पति-पत्नि है और विस्तृत काउंसलिग के बाद दोनो अपना रिश्ता सुधारने के लिए तैयार है उभय पक्ष साथ रहने को तैयार है। उभय पक्ष का 1 वर्ष तक औचक निरीक्षण कर बालोद सखी सेंटर को दिया जायेगा और भविष्य में कभी भी कोई शिकायत होने पर आवेदिका सखी सेंटर में अपनी समस्या बता सकेगी। इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।
एक प्रकरण में आवेदिका ने बताया कि अनावेदकगणों ने आवेदिका केा प्रताड़ित कर घर से निकाल दिया है और उसके दोनो बच्चों को भी छीन लिया है। आवेदिका का पूरा दहेज का सामान व गहने अनावेदक के पास है और दहेज के लिए आवेदिका को प्रताड़ित किया जाता है। आवेदिका को समझाईश दिया गया कि वह अनावेदकगणों के खिलाफ मानसिक, शारीरिक व दहेज प्रताड़ना की प्रकरण दर्ज करवा सकती है अनावेदकगणों के खिलाफ एफ.आई.आर. दर्ज करा कर अपने सभी मामलों का निराकरण न्यायालय से करवा सकती है। इस निर्देश के साथ प्रकरण नस्तीबध्द किया गया।
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