रायपुर/06 अप्रैल 2026/ छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक, सदस्यगण श्रीमती सरला कोसरिया एवं श्रीमती ओजस्वी मंडावी, ने आज छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग के कार्यालय रायपुर में महिला उत्पीड़न से संबंधित प्रकरणों पर सुनवाई की। आयोग की अध्यक्ष डाॅ. किरणमयी नायक की अध्यक्षता में प्रदेश स्तर पर आज 390 वी. एवं रायपुर जिले में 179 वी. जनसुनवाई की गई।
एक प्रकरण के दौरान उभय पक्ष आपस मे पति-पत्नि है। आवेदिका अपने ससुराल में रहना चाहती है लेकिन अनावेदक पक्ष आवेदिका को ले जाने के लिए तैयार नहीं है। अनावेदक पक्ष द्वारा आवेदिका पर दबाव डालकर स्टाम्प पेपर पर लिखा-पढ़ी करके, जिसमें समाज के कुछ लोगोे ने उपस्थित होकर आवेदिका को कहा कि तुम्हारा तलाक हो गया श्इस तरह के दस्तावेज से वैधानिक तलाक नहीं होताश् अनावेदक पक्ष ने आवेदिका को कोई भरण-पोषण नहीं देते, आवेदिका का स्त्रीधन भी वापस नहीं किया गया। आवेदिका अपने पति के साथ रहना चाहती है लेकिन अनावेदक के माता,पिता व भाई उसके वैवाहिक जिंदगी मे बाधा बन रहे है। अनावेदक को पूछने पर वह सुलहवार्ता के लिए तैयार नहीं है। इस स्तर पर आवेदिका सभी अनावेदकगणों के खिलाफ थाना में एफ.आई.आर. दर्ज करवा सकती है।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका के स्व. पति से दो बेटियां है। अनावेदक उसका देवर है। गांव की संयुक्त संपत्ति बरौडा व कांपा में है मकान व खेत भी है। जिसमें आवेदिका अपनी दोनो बेटियों का हक व हिस्सा चाहती है। जिसे अनावेदक ने स्वीकारा और बताया कि संयुक्त संपत्ति में आवेदिका की दोनो बेटियों का नाम है और हिस्सा देने के लिए वह तैयार है। आयोग ने समझाईश दिया कि आवेदिकागण आज ही जाकर बरौंडा व कांपा के मकान में अपना कब्जा ले व खेती की जमीन पर तहसील न्यायालय मे नाम व खाता अलग कराने की कार्यवाही कर सकते है। कब्जा प्राप्त करने के पश्चात् आयोग को सूचित करें। ताकि प्रकरण नस्तीबध्द किया जा सके।
एक अन्य प्रकरण में अनावेदक ने बताया कि भारत माला परियोजना में कोलिहापुरी की लगभग ढाई एकड़ जमीन निकली जिसका मुआवजा लगभग 1 करोड़ 64 लाख रू. अनावेदक के एकाउंट मे है। इस संपत्ति में आवेदिका अपना एक चैथाई हिस्सा चाहती है। उसके अन्य दो भाई और है। आवेदिका के अनुसार कलेक्टर दुर्ग से इस परियोजना के तहत 2 गुना कीमत प्राप्त हुआ है शेष 2 गुना कीमत के लिए मामला लंबित है। आयोग द्वारा कलेक्टर दुर्ग को पत्र प्रेषित कर बैंक आॅफ बडौदा के ब्रांच मैनेजर गंज पारा ब्रांच में अनावेदक के बैंक एकाउंट में दर्ज मो. नं. के बैंक खाते के ट्रांजेक्शन को तत्काल प्रभाव से रोक लगाया जाने हेतु अनुशंसा की जायेगी। ताकि सुलहनामा की प्रक्रिया पूर्ण किया जा सके। अनावेदक को अगली सुनवाई में सभी अनावेदकगणों को साथ लाने को कहा गया ताकि आयोग के समक्ष उपस्थित होकर सुलहनामा पर चर्चा किया जा सके।
एक अन्य प्रकरण में आवेदक ने अपनी पत्नी व बहू की ओर से प्रकरण दर्ज किया था, जिसमें अनावेदक आरक्षक व उसकी पत्नी महिला आरक्षक के विरूध्द अपराध दर्ज किया था तथा शेष अनावेदकगण थाना- पिपरिया जिला- कबीरधाम के पुलिस अधिकारी व कर्मचारिगण है। सभी अनावेदकगण पुलिस कर्मचारी है। इस प्रकरण में आरक्षक व उसकी पत्नी महिला आरक्षक आवेदकगणों के पडोसी है। वह अपनी पुलिसिया हथकंडो का इस्तेमाल करते हुए फर्जी एफ.आई.आर दर्ज कराकर षड्यंत्र पूर्वक आवेदक की पत्नी, बहू व उसके नाबालिक 4 माह का बेटा 2 माह तक जेल में था। आवेदक पक्ष उनकी पत्नी व बहू ग्रामीणजन होने के कारण अनावेदकगणों के पुलिसिया चक्रव्हूह से नहीं निकल पाये और उन्हें न्यायालय से 45 दिन की सजा हुई।
आवेदक पक्ष की शिकायत को किसी भी पुलिस अधिकारी ने इसलिए दर्ज नहीं किया क्योकि शिकायतकर्ता स्वयं पुलिस है। सभी पुलिस वालों ने अपने ही विभाग के आरक्षक की शिकायत पर आवेदक की बहू, पत्नि को नाबालिक बच्चे सहित जेल में डाल दिया था। आयोग द्वारा प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच कराये जाने हेतु छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकार कार्यालय शंकर नगर को पत्र प्रेषित किये जाने का आदेश दिया कि थाना- पिपरिया, जिला- कबीरधाम के पुलिस अधिकारी व कर्मचारी मिलकर अपने थाने के आरक्षक की रिपोर्ट पर निर्दोष महिलाओं व नाबालिग बच्चे के खिलाफ आपराधिक प्रकरण बना कर कार्यवाही कर अपने अधिकारो व कर्तव्यों का उल्लंघन करने करने के स्पष्ट तथ्य इस प्रकरण मे मौजूद है।
इस प्रकरण को छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस जवाबदेही प्राधिकार कार्यालय में भेजकर समस्त पुलिस अधिकारी कर्मचारियों के खिलाफ जांच कर प्रतिवेदन 1 माह के भीतर प्रेषित करने का आदेश आयोग द्वारा दिया गया। साथ ही डी.जी.पी. छत्तीसगढ़ को पुलिस अधिकारी व कर्मचारियों के खिलाफ अपने पद का दुरूप्योग करने के लिए उचित कार्यवाही की अनुशंसा भी आयोग द्वारा की जायेगी।
भिलाई स्टील प्लांट अपने पुरूष कर्मचारियों को किस तरह से बचाता है यह महिला आयोग में साबित हुआ है। पुरूष कर्मचारी दो-दो महिलाओं से अवैध रिश्ता रखता है और अपने पत्नी बच्चें को भरण-पोषण नहीं देता। महिला आयोग के सुनवाई में इनके अधिकारी उपस्थित होते है और आयोग की सुनवाई में बीएसपी के आश्वासन देते है पत्नी और उनके बच्चों को पर्याप्त भरण-पोषण अनावेदक के वेतन से दिया जायेगा। सुनवाई के बाद में आॅफिस मे जाकर मामले की लिपापोती करते है। इसकी पुष्टि होने पर जब पूछताछ किया गया तो भिलाई स्टील प्लांट ने कहा कि हमने लाॅ डिपार्टमेंट को भेजा था, कर्मचारी ने लिखकर दे दिया इस लिए हम भरण-पोषण व वेतन की राशि नहीं दे सकते।
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भिलाई स्टील प्लांट के द्वारा इस पर कोई कार्यवाही नही की गई। कुल मिलाकर कोई भी पुरूष जो भिलाई स्टील प्लांट मे कार्यरत् है वह अपनी पत्नी बच्चों को परेशान कर सकता है, अवैध रिश्ते मे रह सकता है, पत्नी-बच्चों को भूखे मारने के लिए छोड़ सकता है। फिर भी भिलाई स्टील प्लांट कुछ भी कार्य नहीं करेगा। अपने कर्मचारियों के खिलाफ कोई शिकायत नहीं करेगा। इस बात पर आज आयोग द्वारा बीएसपी के शीर्ष अधिकारी को जमकर लताड़ लगाई गई|

