देश का विरोध करते-करते भगवान राम का विरोध करने वालों का यही हश्र होना था। यशस्वी प्रधानमंत्री श्रद्धेय नरेंद्र मोदी जी और चुनावी रणनीति में बेहद चौकन्ने और अब तक के सर्वोच्च कुशल संगठनकर्ता आदरणीय केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह जी की शानदार, दमदार और जानदार राजनयिक जुगलबन्दी ने कश्मीर से धारा 370 को हटाने के बाद अब बंगाल पर विजय हासिल करके देश को चौतरफा विकास की ओर और आगे बढ़ा दिया है। भाजपा पश्चिम बंगाल की 293 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटों की जीत के साथ बंग भूमि को प्राचीन काल की तरह और उर्वर बनाने के लिए बेहद पुख्ता ढंग से काबिज हो गई है। पूर्व प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की कश्मीर नीति का प्रखर विरोध करते हुए अपनी जान तक गंवाने वाले मां भारती के अजर अमर लाल और पश्चिम बंगाल में ही जन्में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आत्मा आज बंगाल में हर तरफ़ भगवा लहराने से संतृप्त हुई होगी। मैं डॉक्टर साहब के अमर बलिदान को याद करते हुए यही कहना चाहूंगा वंदे मातरम, तेरा वैभव अमर रहे मां…अब हम सभी बड़े गर्व से कह सकेंगे कि जहाँ जन्में डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी वह बंगाल भीहमारा है। अब गंगोत्री से गंगासागर तक हम सभी को पतित पावनी मां गंगा का भरपूर आशीर्वाद मिल रहा है। चुनाव परिणाम बंगाल के लोगों की सामूहिक राष्ट्रीय चेतना का भव्य
प्रदर्शन है। यह जीत देश की राजनीति के लिए एक निर्णायक मोड़ है। ये जीत सिर्फ बंगाल की जीत नहीं है, ये पूरे देश की जीत है, ये सनातन की जीत है और घुसपैठ के विरोध की जीत है। यह जीत बंगाल में व्याप्त अनार्की (अराजकता) और कानून-व्यवस्था के समाप्त होने के विरुद्ध जनता का जनादेश है। पिछले 15-20 सालों से बंगाल का विकास रुक गया था और जनता नारकीय जीवन जीने को मजबूर थी, जिससे अब उन्हें मुक्ति मिली है। पश्चिम बंगाल की धरती पर भाजपा की यह प्रचंड विजय केवल एक चुनावी परिणाम नहीं, बल्कि उस विचार, उस संकल्प और उस बलिदान की गूंज है, जिसकी नींव अखंड भारत के शाश्वत प्रणेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने रखी थी। यह जीत उन सपनों की जीत है, जो उन्होंने एक अखंड, सशक्त और आत्मसम्मान से भरे भारत के लिए देखे थे। यह जीत उस राष्ट्रवाद की जीत है, जिसके लिए उन्होंने हर संघर्ष को स्वीकार किया और अंततः अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी तपस्या, त्याग और बलिदान आज हर कार्यकर्ता की प्रेरणा बनकर खड़ा है। यह जनादेश उस संकल्प का प्रमाण है कि भारत की आत्मा को कोई दबा नहीं सकता, और राष्ट्रहित की आवाज हमेशा बुलंद होती है। यह विजय जन-जन के विश्वास, समर्थन और लोकतंत्र के प्रति उनकी अटूट आस्था का परिणाम है। पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं का विशेष रूप से अभिनंदन है, जिनके अथक परिश्रम, निष्ठा और जनसेवा के भाव ने इस ऐतिहासिक जीत को संभव बनाया है। भाजपा के नव नियुक्त हमारे अध्यक्ष महोदय नितिन नवीन जी के कुशल मार्गदर्शन से पार्टी को ऐसी सुनहरी जीत मिल सकी है। बूथ स्तर से लेकर प्रत्येक क्षेत्र तक कार्यकर्ताओं ने जिस ऊर्जा और समर्पण के साथ कार्य किया, वही इस सफलता की असली ताकत है। आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का कहना है कि आज से बंगाल भयमुक्त हुआ है। विकास के भरोसे से युक्त हुआ है।चुनाव के बाद यहां एकदम से हालात बदल गए हैं और जज्बात बदल गए हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं और जन जन में यह विश्वास है कि भाजपा बंगाल को उसका पुराना वैभव देने में अवश्य कामयाब होगी। पहले काँग्रेस फिर वामपंथी दलों और बाद में ममता बनर्जी की अत्याचारी और हिंदू दमनकारी सरकार की वज़ह से कुंद हो चुके हिंदुत्व ने आपसी प्रेम बंधुत्व और भाई चारे के माहौल में अपनी धर्म संस्कृति और संस्कारों के साथ ख़ुशी ख़ुशी जीना शुरू कर दिया है।बंगाल के हिंदुओं के चेहरे में एक अपरिमित ख़ुशी झलक रही है। जिसमें आत्म संतोष के भाव साफ साफ देखें जा सकते हैं। सबसे पहले अंग्रेजों ने उर्वर बंगाल की भूमि का विभाजन कर देश की आर्थिक-सामाजिक संस्कृति को चोट पहुँचाई। कालांतर में
वामपंथियों ने 34 साल तक पश्चिम बंगाल में शासन किया और नतीजा यह रहा कि जो राज्य कभी देश की राजधानी हुआ करता था और विकसित राज्यों की श्रेणी में था वह आज नीचे से भी कहीं नहीं रहा। और फ़िर ममता बनर्जी का आतंक सिंडीकेट माफियाओं ने इस राज्य के लोगों के अमन चैन और ख़ुशहाल संस्कृति का सत्यानाश कर डाला। ममता राज में तो लूट-पाट, डकैती, सरे आम हत्या आगजनी और बमबारी बंगाल की दिनचर्या हो गई। बंगाल में वामपंथियों ने अपने विरोधियों के साथ ऐसा व्यवहार किया कि सात पुश्तों तक ये लोग कभी नहीं भूल सकते हैं। लेकिन अब सब बदल जाएगा। 2008 के सिंगूर और नंदीग्राम आंदोलन (भूमि अधिग्रहण विवाद) के कारण वामपंथियों का वर्चस्व समाप्त करते हुए 2011 में राज्य की सत्ता में आई ममता बनर्जी ने अपनी सत्ता को हर हाल में क़ायम रखने के लिए अनगिनत ग़ैर कानूनी गतिविधियों को बढ़ावा दिया।अपने शासन में बंगाल का खूब औद्योगिक पतन कराया और यहां राजनीतिक हिंसा में समय के साथ लगातार वृद्धि भी होती रही। ‘मां, माटी, मानुष’ के नारे के साथ वामपंथी सत्ता को उखाड़ फेंक सत्ता में आई ममता बनर्जी ने बाद में माँ माटी मानुष को भूलते हुए
बुनियादी ढांचे के विकास, कन्याश्री जैसी कल्याणकारी लोक लुभावन योजनाओं और अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की राजनीति पर ही ध्यान केंद्रित कर लिया। उनके
संपूर्ण शासनकाल में राजनीतिक हिंसा, भ्रष्टाचार के आरोप सहते हुए बंगाल को उसका पुराना वैभव लौटाने में संघर्षरत विपक्षी भाजपा को हर समय ममता बनर्जी से कड़ी टक्कर मिली। भाजपा ने ममता बनर्जी के खिलाफ़ राजनयिक वर्चस्व की ज़ंग और खून खराबे में अपने सैंकड़ों कार्यकताओं को खोया है।आज बंगाल की इस यादगार जीत से उनकी सभी की आत्मा को शांति मिली होगी।बंगाल की यह जीत, उन सभी कार्यकर्ताओं को ही समर्पित है, जिन्होंने संघर्ष करते हुए अपनी जान गंवाई है। पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम काफ़ी कुछ बतानेवाले हैं। वे चुनाव परिणाम काफ़ी चौकाने वाले इसलिए नहीं हैं कि यह तो होना ही था। लोगों को आप हर समय पागल और बरगला नहीं सकते हैं। गत 45 वर्षों
वर्षों से प्रचारित और प्रसारित बंगाल की बौध्दिक प्रगति हम सभी को यही समझाती रही कि देश, समाज, राष्ट्रीय हित इत्यादि बंगाल में नहीं चलता है। गत 45 साल यहां के धर्मिक और सामाजिक साथ ही मेहनती और लगनशील लोगों की आवाज को इन्हीं तथाकथित प्रगतिशील लोगों ने दबाकर रखा था जो बंगाल चुनाव परिणाम के रूप में साकार हुई है। बंगाल अब आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के कुशल प्रशासनिक ढांचे में सामाजिक-आर्थिक विकास के साथ साथ धार्मिक संस्कारों में फलीभूत होते हुए फ़िर से अपनी उर्वरता हासिल करते हुए देश को और विकसित करने में अपना शाश्वत योगदान देता रहेगा। समूचे बंगाल को इन्हीं शुभकामनाओं के साथ
बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर सांसद, पूर्व कैबिनेट मंत्री छत्तीसगढ़ भाजपा सरकार
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