पद्मश्री डॉ. बुधरी ताती से भेंट कर वनमंत्री केदार कश्यप ने किया सम्मानित

रायपुर, 21 जून 2026 : छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के हीरानार गाँव की निवासी डॉ. बुधरी ताती (बड़ी दीदी) ने चार दशकों से अधिक समय तक वनांचल और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम करके जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आदिवासी उत्थान में अद्वितीय योगदान दिया है । उन्हें उनके इस ऐतिहासिक और निरूस्वार्थ समाज सेवा के लिए भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया है ।

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण एवं राष्ट्र निर्माण के 12 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में चलाए जा रहे विशेष जनसंपर्क अभियान के अंतर्गत वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने दंतेवाड़ा जिले के ग्राम हीरानार स्थित मां शखिनी महिला उत्थान केंद्र पहुंचकर पद्मश्री सम्मान से अलंकृत प्रख्यात जनजातीय समाजसेवी डॉ. बुधरी ताती से आत्मीय मुलाकात की।

इस अवसर पर वनमंत्री श्री कश्यप ने डॉ. बुधरी ताती को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके स्वास्थ्य और कुशलक्षेम की जानकारी ली। उन्होंने जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं के संरक्षण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान की सराहना की।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं डॉ. बुधरी ताती

वनमंत्री श्री कश्यप ने कहा कि डॉ. बुधरी ताती ने जनजातीय समाज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के साथ-साथ महिलाओं को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। उनका जीवन और कार्य नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि डॉ. ताती का योगदान केवल बस्तर क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए गौरव का विषय है। समाज और संस्कृति के प्रति उनकी प्रतिबद्धता राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

समाज की प्रेरणादायी विभूतियों से संवाद का अभियान

वनमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की 12 वर्षों की उपलब्धियों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए विशेष जनसंपर्क अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत समाज की प्रेरणादायी विभूतियों से संवाद कर उनके अनुभवों और विचारों को लोगों तक पहुंचाया जा रहा है, ताकि समाज को सकारात्मक दिशा और प्रेरणा मिल सके।

महिला स्वावलंबन की गतिविधियों की सराहना

इस दौरान वनमंत्री श्री कश्यप ने मां शखिनी महिला उत्थान केंद्र की विभिन्न गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने महिलाओं द्वारा संचालित आजीविका, स्व-रोजगार और आत्मनिर्भरता से जुड़े कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

महिला सशक्तिकरण और संस्कृति संरक्षण का उत्कृष्ट उदाहरण

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मां शखिनी महिला उत्थान केंद्र जनजातीय संस्कृति के संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरणादायी कार्य कर रही है। यह केंद्र महिलाओं को आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ स्थानीय परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।