जयपुर, 04 नवम्बर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की मंशानुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री राजेश यादव के कुशल मार्गदर्शन एवं प्रभावी मॉनिटरिंग में प्रदेश में नवाचार और परिणाम आधारित प्रयासों को नई गति मिल रही है। उनके निर्देशानुसार ‘स्टार टीचर’ पहल के माध्यम से उत्कृष्ट शिक्षकों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, वहीं ‘राजस्थान शिक्षा सेतु अभियान’ से प्रत्येक बच्चे को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इन समन्वित प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सरकारी विद्यालयों में पांच साल बाद नामांकन में हुई ऐतिहासिक वृद्धि के रूप में सामने आया है।
उत्कृष्ट शिक्षकों के सम्मान के लिए ‘स्टार टीचर’ पहल की शुरुआत—
सरकारी विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक परिणाम देने वाले तथा शिक्षण की प्रभावी एवं नवाचारी विधियों को अपनाने वाले शिक्षकों को पहचान और प्रोत्साहन प्रदान करने के उद्देश्य से स्कूल शिक्षा विभाग ने अक्टूबर माह में ‘स्टार टीचर’ पहल शुरू की है। इस पहल के तहत 26 अक्टूबर को जारी पहली सूची में प्रदेश के आठ सरकारी विद्यालयों के 15 शिक्षकों को राजस्थान के पहले ‘स्टार टीचर’ के रूप में चयनित किया गया है।
इस पहल का मूल्यांकन दो प्रमुख आधारों पर किया गया है –
CBA परिणाम (11 शिक्षक): प्रत्येक संभाग के मार्च 2026 के कॉम्पिटेंसी बेस्ड असेसमेंट (CBA) परिणामों के आधार पर सर्वोच्च रैंक प्राप्त करने वाले विद्यालयों के 11 शिक्षकों का चयन किया गया, जिन्होंने विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रदर्शन में सराहनीय योगदान दिया।
नवाचारी शिक्षण पद्धतियाँ (4 शिक्षक): कक्षा-कक्ष में कठिन अवधारणाओं को सरलता से समझाने, शैक्षणिक खेलों एवं शिक्षण-अधिगम सामग्री (TLM) के रचनात्मक उपयोग पर आधारित संक्षिप्त वीडियो के आधार पर 4 शिक्षकों का चयन किया गया। वीडियो का मूल्यांकन 4 निर्धारित मापदंडों (कुल 20 अंक) के आधार पर पारदर्शी रूप से किया गया।
चयनित सभी शिक्षकों को शिक्षक ऐप पर डिजिटल प्रमाण पत्र प्रदान किए गए हैं, जबकि उनकी सूची शाला दर्पण पोर्टल पर उपलब्ध कराई गई है। यह प्रक्रिया अब प्रत्येक माह नियमित रूप से संचालित की जाएगी।
राजस्थान शिक्षा सेतु अभियान’: हर बच्चे को शिक्षा से जोड़ने का संकल्प—
शिक्षा से वंचित हर बच्चे को स्कूल में प्रवेश दिलाने के उद्देश्य से विभाग द्वारा ‘राजस्थान शिक्षा सेतु अभियान’ दो चरणों में शुरू किया गया है। अभियान के तहत प्रत्येक प्रधानाचार्य द्वारा एक शिक्षक को एक बच्चे की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है, जो बच्चे के परिवार से संपर्क कर नामांकन सुनिश्चित करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी शाला दर्पण पोर्टल और डैशबोर्ड के माध्यम से की जा रही है।
अभियान की प्रभावी निगरानी के लिए CBEO स्तर पर हर 15 दिन में समीक्षा, CDEO द्वारा प्रगति पर नज़र, तथा जिला कलेक्टर द्वारा प्रति माह समीक्षा की जा रही है। अभियान में बालिकाओं, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों, प्रवासी, बाल श्रमिक, आदिवासी एवं घुमंतू समुदाय के बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
5 साल बाद नामांकन में ऐतिहासिक वृद्धि और बेटियों का बढ़ता भरोसा—
राजस्थान शिक्षा सेतु अभियान और विभागीय प्रयासों के परिणामस्वरूप प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में पाँच साल बाद पहली बार नामांकन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है –
कुल नामांकन में वृद्धि: जुलाई 2026 तक सरकारी विद्यालयों में कुल नामांकन बढ़कर 72,98,854 हो गया है, जो कि वर्ष 2025-26 के नामांकन (72,50,496) की तुलना में 48,358 अधिक है।
बालिकाओं का दबदबा: कुल नामांकन में 53.3 प्रतिशत (38,92,355) बालिकाएँ और 46.7 प्रतिशत (34,06,486) बालक हैं।
लैंगिक अनुपात: इस वर्ष सरकारी स्कूलों में बालिकाओं का नामांकन बालकों से लगभग 4.86 लाख अधिक रहा है। वर्तमान में प्रत्येक 1,000 बालकों पर 1,143 बालिकाएँ नामांकित हैं, जो बालिका शिक्षा के प्रति समाज के बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
जिलेवार स्थिति: बांसवाड़ा (11,939), उदयपुर (9,448), बाड़मेर (5,937), जालोर (5,485) और सिरोही (4,295) में नामांकन में भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि जिन जिलों में नामांकन में कमी आई है, वहाँ ड्रॉपआउट रोकने हेतु विशेष समीक्षा की जा रही है।
शिक्षकों के मनोबल को बढ़ाने और हर बच्चे तक शिक्षा की पहुँच सुनिश्चित करने की यह दोहरी रणनीति मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की मंशा के अनुरूप प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक परिणामोन्मुखी, समावेशी और सुदृढ़ बना रही है।

