पश्चिम बंगाल में टीएमसी सरकार में कोई सुरक्षित नहीं हैं- संतोष पांडेय

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता और सांसद संतोष पाण्डेय ने एसआईआर प्रक्रिया के दौरान प. बंगाल के 150-जादवपुर विधानसभा क्षेत्र के बूथ नंबर 110 के बूथ लेवल ऑफिसर अशोक दास की मौत के लिए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को जिम्मेदार ठहराते हुए पार्टी के इस अलोकतांत्रिक आचरण की कड़ी निन्दा की है। श्री पाण्डेय ने कहा कि इस घटना ने लोकतंत्र की आत्मा को झकझोर कर रख दिया है। पश्चिम बंगाल की धरती, जो कभी लोकतांत्रिक चेतना और बौद्विक परंपरा के लिए जानी जाती थी, आज टीएमसी शासनकाल में भय, दबाव और राजनीतिक हिंसा की प्रयोगशाला बना दी गई है। सवाल यह है कि क्या अब चुनाव ड्यूटी निभाना भी पश्चिम बंगाल में जान जोखिम में डालने जैसा हो गया है?

भाजपा मुख्य प्रदेश प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने शनिवार को यहाँ एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में आहूत पत्रकार वार्ता में कहा कि स्व. दास एक ईमानदार सरकारी कर्मचारी थे और टीएमसी नेताओं द्वारा उन पर लगातार ऐसा दबाव बनाया गया कि दास को आत्महत्या जैसा दुर्भाग्यपूर्ण कदम उठाने के लिए विवश होना पड़ा। पार्ट नंबर 110 के बूथ लेवल ऑफिसर अशोक दास को वार्ड नंबर 109 की टीएमसी नेता अनन्या बनर्जी और राजू बिस्वास ने बार-बार धमकियाँ दीं। उन्हें चेतावनी दी गई थी कि अगर उन्होंने वोटर लिस्ट से किसी भी अवैध वोटर को हटाया, तो न सिर्फ उन्हें मार दिया जाएगा, बल्कि उनकी पत्नी और छोटे बच्चे को भी नुकसान पहुँचाया जाएगा। श्री पाण्डेय ने कहा कि यह सिर्फ एक आत्महत्या नहीं है, बल्कि यह सत्तारूढ़ दल के दबाव में कुचले गए एक ईमानदार अधिकारी की चुप कराई गई आवाज़ है। लगातार मानसिक दबाव, भय और असुरक्षा के चलते अशोक दास ने आत्महत्या जैसा दुर्भाग्यपूर्ण कदम उठाया। इस दु:खद घटना के बाद पश्चिम बंगाल में टीएमसी की नई परिभाषा बन गई है- टी – तुष्टिकरण की राजनीति, एम – माफिया और गुंडा राज, सी – क्राइम कल्चर।

भाजपा मुख्य प्रदेश प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने कहा कि आज टीएमसी के इन कारनामों के कारण पश्चिम बंगाल में रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी घुसपैठियों को छोड़कर कोई भी सुरक्षित नहीं हैं जिन्हें अपने वोट बैंक के लिए प. बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी संरक्षण दे रही हैं। ममता बनर्जी खुद को लोकतंत्र की रक्षक कहती हैं तो आज इस मसले पर चुप्पी क्यों है? क्या अवैध घुसपैठियों को बचाने की राजनीति इतनी बड़ी हो गई है कि देश के नागरिकों, चुनाव अधिकारियों और उनके परिवारों की जान की कोई कीमत नहीं रह गई? भाजपा यह स्पष्ट करना चाहती है कि यह लड़ाई किसी पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि डर, दमन और चुनावी धोखाधड़ी की राजनीति के खिलाफ है। भाजपा इस अन्याय के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी। हम स्व. अशोक दास को न्याय दिलाने और बंगाल को भयमुक्त बनाने तक यह संघर्ष जारी रखेंगे। श्री पाण्डेय ने कहा कि ममता बनर्जी के शासन में बंगाल अब ‘सोनार बांग्ला’ नहीं, बल्कि ‘खूनी खेल का मैदान’ बन चुका है, जहाँ एक ओर सरकारी कर्मचारी अपनी ड्यूटी निभाने के डर से जान दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सत्ता के संरक्षण में पल रहे गुंडे खुलेआम चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं को आग के हवाले कर रहे हैं।

भाजपा मुख्य प्रदेश प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने कहा कि आज सवाल सिर्फ न्याय का नहीं है, सवाल यह है कि क्या बंगाल में सच बोलने की इजाज़त बचेगी? क्या लोकतंत्र डर के साए में सांस लेता रहेगा? अशोक दास की मौत का जिम्मेदार कौन है? क्या ममता दीदी अपने इन नेताओं पर कार्रवाई करेंगी, या हमेशा की तरह उन्हें इनाम दिया जाएगा? श्री पाण्डेय ने उत्तर दिनाजपुर के चाकुलिया की घटना जिक्र कर कहा कि वहाँ बीडीओ कार्यालय में एस.आई.आर. की सुनवाई के दौरान टीएमसी के उपद्रवियों ने ‘अल्पसंख्यकों के नाम हटाने’ का बहाना बनाकर कार्यालय को फूँक दिया, मशीनें तोड़ दीं और अधिकारियों पर हमला किया। श्री पाण्डेय ने कहा कि सच तो यह है कि टीएमसी अवैध घुसपैठियों और फर्जी मतदाताओं के दम पर चुनाव जीतना चाहती है। जब चुनाव आयोग इन फर्जी नामों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करता है. तो टीएमसी हिंसा पर उतर आती है। यह ‘तुष्टिकरण की राजनीति’ का सबसे भयावह चेहरा है, जहाँ वोट बैंक को बचाने के लिए पूरे संवैधानिक ढाँचे को आग लगाई जा रही है।

भाजपा मुख्य प्रदेश प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने कहा कि पश्चिम बंगाल में कई वर्षों से मतदाता सूची में लाखों अवैध नामों के आरोप लगते रहे हैं। कई रिपोर्ट बताती हैं कि वर्ष 2011 से 2019 के बीच बंगाल में घुसपैठ की संख्या में भारी वृद्धि हुई। टीएमसी वर्षों से रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों को संरक्षण देकर उन्हें वोट बैंक में बदल रही है। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण से ममता बनर्जी और उनकी पार्टी को बहुत दिक्कत हो रही है। श्री पाण्डेय ने कहा कि आज बंगाल में फेक आईडी रैकेट सक्रिय है। ये देशद्रोही तत्व 10 हजार रुपये से लेकर 10 लाख तक में हमारी राष्ट्रीय पहचान को बेच रहे हैं। ये घुसपैठिए इसी फेक आईडी के सहारे न सिर्फ वोट डाल रहे हैं, बल्कि बंगाल के बच्चों की नौकरियाँ भी छीन रहे हैं। बंगाल की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में सीमा पर बाड़ लगाने के लिए राज्य सरकार से जमीन मांगी थी, लेकिन टीएमसी ने सहयोग करने से इनकार कर दिया। यह तुष्टिकरण की राजनीति का सबसे खतरनाक उदाहरण है। जब राष्ट्रीय सुरक्षा की कीमत पर वोट बैंक साधा जाए, तो यह सिर्फ नाकामी नहीं, बल्कि देश की संप्रभुता से खिलवाड़ है। ममता सरकार का यह रवैया यह दिखाता है कि तुष्टिकरण की राजनीति के आगे देश की सुरक्षा भी उनके लिए कोई महत्व नहीं रखती है।

पत्रकार वार्ता के दौरान प्रदेश प्रवक्ता द्वय देवलाल ठाकुर व डॉ. किरण बघेल, भाजपा नेता राजीव चक्रवर्ती और सूरजपुर जिला भाजपा उपाध्यक्ष अनूप सिन्हा उपस्थित थे।

पाण्डेय के ममता बनर्जी से सवाल

भाजपा मुख्य प्रदेश प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने कहा कि पश्चिम बंगाल में आज न लोकतंत्र सुरक्षित है, न लोकतांत्रिक व्यवस्था और न ही वे लोग जो इस लोकतांत्रिक व्यवस्था को चलाते हैं। भाजपा इस दमनकारी शासन के खिलाफ चुप नहीं बैठेगी। हम मांग करते हैं कि अशोक दास मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो और चाकुलिया में हिंसा करने वाले टीएमसी गुंडों पर तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए। श्री पाण्डेय ने कहा कि आज देश ममता बनर्जी से इन सवालों का जवाब मांग रहा है :

  1. क्या अशोक दास की पत्नी और अनाथ हुए बच्चे को न्याय मिलेगा?
  2. क्या आप उन नेताओं को पार्टी से निकालेंगी, जिन्होंने एक सरकारी कर्मचारी को आत्महत्या के लिए उकसाया?
  3. क्या पश्चिम बंगाल में अब चुनाव आयोग की स्वतंत्र प्रक्रिया का पालन करना ‘मौत की सजा’ बन गया है?

4. कब तक आप ‘वोट बैंक’ के लिए बंगाल को अराजकता की आग में झोंकती रहेंगी?

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